Haldwani: हल्द्वानी के कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने मनरेगा का नाम बदलने के केंद्र सरकार के फैसले की कड़ी निंदा करते हुए इसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सम्मान और गरीबों के अधिकारों पर सीधा हमला बताया है। उन्होंने कहा कि इस कदम से ग्रामीण बेरोजगारी बढ़ेगी और मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना का मूल उद्देश्य कमजोर होगा।
हल्द्वानी में आयोजित प्रेस वार्ता में सुमित हृदयेश ने केंद्र की भाजपा गठबंधन सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) केवल एक योजना नहीं, बल्कि देश के गरीब, मजदूर और ग्रामीण वर्ग के लिए जीवनरेखा रही है। इसके नाम और स्वरूप से छेड़छाड़ करना जनविरोधी सोच को दर्शाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मनरेगा के तहत मिलने वाले 100 दिन के रोजगार को घटाकर 60 दिन करने की दिशा में काम कर रही है, जो गरीबों के कानूनी अधिकारों पर सीधा प्रहार है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी, भुखमरी और आर्थिक असुरक्षा और गहराएगी।
सुमित हृदयेश ने कहा कि पहले मनरेगा के कार्य ग्राम प्रधान और ग्राम सभा की संस्तुति से तय होते थे, जिससे स्थानीय जरूरतों के अनुसार रोजगार सृजित होता था। अब इस व्यवस्था को खत्म कर कार्यों का नियंत्रण दिल्ली से किए जाने की योजना पंचायती राज व्यवस्था और ग्रामीण आत्मनिर्भरता को कमजोर करेगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह बदलाव पहाड़ों से पलायन रोकने के बजाय उसे और तेज करने की साजिश है। साथ ही केंद्र और राज्य के अंशदान अनुपात को 90:10 से बदलकर 60:40 करना राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने जैसा है, जिससे योजना का प्रभावी क्रियान्वयन प्रभावित होगा।
प्रेस वार्ता में सुमित हृदयेश ने भाजपा को खुली बहस की चुनौती देते हुए कहा कि कांग्रेस मनरेगा सहित सभी जनहित के मुद्दों पर तथ्यों के साथ चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने हल्द्वानी प्रशासन पर भी अनावश्यक लाल निशान लगाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे आम जनता में भय का माहौल बन रहा है।
उन्होंने जनता से अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर जनविरोधी नीतियों का विरोध करने की अपील की। प्रेस वार्ता में महानगर कांग्रेस कमेटी हल्द्वानी के अध्यक्ष गोविंद सिंह बिष्ट, महिला कांग्रेस अध्यक्ष मधु सांगुड़ी सहित कई कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

Chief Editor, Aaj Khabar
