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New Delhi: जंतर-मंतर पर घुसकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी और तिरंगा फहराने के मामले में CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिन की जेल, राहुल गांधी समेत विपक्ष ने उठाए सवाल

New Delhi: जंतर-मंतर पर घुसकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी और तिरंगा फहराने के मामले में CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिन की जेल, राहुल गांधी समेत विपक्ष ने उठाए सवाल
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New Delhi: दिल्ली के जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। दोनों नेताओं को तिहाड़ जेल में रखा गया है। इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह, आतिशी, सौरभ भारद्वाज, योगेंद्र यादव और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण समेत कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 13 अक्टूबर को CJP के 14 सदस्य प्रतिबंधित जंतर-मंतर क्षेत्र में निजी परिसर के रास्ते पहुंचे और पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डाली। इस मामले में कनॉट प्लेस और पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में दो एफआईआर दर्ज की गईं। पुलिस ने सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे के खिलाफ एहतियाती कार्रवाई की। तीनों को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। इसके बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जबकि अजिंक्य शिंदे को छह महीने तक शांति बनाए रखने के लिए 5,000 रुपये के मुचलके पर पाबंद किया गया।

दोनों नेताओं को जेल भेजे जाने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं। CJP नेताओं का कहना है कि वे भारतीय तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचे थे और उन्होंने ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए थे। वहीं, पुलिस की कार्रवाई शांति बांड की कथित अवहेलना और प्रदर्शन स्थल में अनधिकृत प्रवेश के आरोपों से जुड़ी है। इस घटनाक्रम ने राष्ट्रीय ध्वज फहराने, प्रदर्शन की अनुमति और नागरिकों के विरोध करने के अधिकार को लेकर बहस छेड़ दी है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सौरव दास और आशुतोष रांका को जेल भेजे जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने एक्स पर लिखा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा फहराना कोई अपराध नहीं है और इसके लिए युवाओं को जेल भेजना कायरतापूर्ण कार्रवाई है। राहुल गांधी ने कहा कि छात्र, युवा, पत्रकार और INDIA गठबंधन अलग-अलग मंचों से नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर भारत के लोगों का है और इसे फिर से हासिल किया जाएगा।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “क्या अपने ही देश में अपना झंडा लहराना अपराध है? यह बिल्कुल बेतुका है।”

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या देश में ब्रिटिश राज चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि CJP नेताओं को तिरंगा फहराने और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने के कारण जेल भेजा गया है। संजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय पर लंबे समय तक तिरंगा नहीं फहराए जाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार को युवाओं से टकराव नहीं लेना चाहिए और दावा किया कि युवा सरकार की कथित तानाशाही का अंत करेंगे।

दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर हैरानी जताई। उन्होंने एक्स पर कहा कि भारतीय तिरंगा फहराने के लिए युवाओं को जेल भेजना चौंकाने वाला है। आतिशी ने मौजूदा हालात की तुलना आपातकाल से करते हुए आरोप लगाया कि स्थिति उस दौर से भी ज्यादा खराब है।

आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत को तानाशाही करार दिया। उन्होंने 1975 के आपातकाल और 2026 के मौजूदा राजनीतिक हालात के बीच समानताएं गिनाईं। भारद्वाज ने चुनावी गड़बड़ियों के आरोप, युवा आंदोलनों, आर्थिक स्थिति और विदेश नीति से जुड़े सवालों का जिक्र करते हुए सरकार की आलोचना की।

NCP (SP) के प्रवक्ता अनीश गावंडे ने सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत पर सवाल उठाते हुए नीतीश कुमार से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ तिरंगा फहराने के मामले में युवाओं को पांच दिन के लिए जेल भेजा गया, जबकि दूसरी ओर कनॉट प्लेस में हथियार लेकर पहुंचे हिंदू क्रांति दल के कार्यकर्ताओं को उसी शाम जमानत मिल गई। उन्होंने दोनों मामलों में कार्रवाई की समानता पर सवाल उठाए और सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की।

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने दोनों नेताओं को तिहाड़ जेल भेजे जाने पर सवाल उठाते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की। संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने पूछा कि क्या भारत में तिरंगा फहराना अपराध बन गया है। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को तानाशाही बताते हुए कहा कि इस तरह की रणनीति सफल नहीं होगी।

सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने भी दोनों नेताओं का समर्थन करते हुए सवाल किया कि तिरंगा फहराने के लिए जेल क्यों जाना पड़ रहा है। उन्होंने लोगों से सौरव दास और आशुतोष रांका के समर्थन में खड़े होने की अपील की।

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने जंतर-मंतर पर प्रवेश और राष्ट्रीय ध्वज फहराने को लेकर कानूनी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की अधिसूचना से बाहर कर दिया गया है, तो वहां प्रवेश करके राष्ट्रीय ध्वज फहराने में अपराध क्या है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या देश में कहीं भी राष्ट्रीय ध्वज फहराना अपराध माना जा सकता है।

CJP की लीगल हेड रतना सिंह ने दिल्ली पुलिस पर अदालत के सामने गलत जानकारी रखने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने अदालत में कहा कि जंतर-मंतर पर दूसरे प्रदर्शनकारियों को भी जुटने का आह्वान किया गया था, जबकि ऐसा कोई सार्वजनिक आह्वान नहीं हुआ था। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारी वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों पर काम कर रहे हैं।

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने नागपुर में रहते हुए संविधान, लोकतंत्र और मतदान के अधिकारों की रक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि देश के नागरिक होने के नाते संविधान और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाना सभी का कर्तव्य है। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल किया कि आखिर देश में तिरंगा फहराना शांति भंग करने का मामला कब से बन गया।

CJP नेता अजिंक्य शिंदे ने कहा कि वह सौरव दास, आशुतोष रांका और पार्टी के अन्य स्वयंसेवकों के साथ भारतीय ध्वज लेकर जंतर-मंतर पहुंचे थे, जहां ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए गए। उन्होंने दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की तुलना ब्रिटिश शासन के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों को जेल भेजे जाने से की। शिंदे ने बताया कि अभिजीत दीपके पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में शामिल होंगे।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति, राष्ट्रीय ध्वज फहराने के अधिकार और पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दोनों नेताओं की रिहाई की मांग उठाई है, जबकि मामले में पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों और न्यायिक कार्रवाई के कानूनी पहलुओं पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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