Almora: जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान शहीद हुए लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी को उनके पैतृक गांव पांडेखोला में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। सेना के हेलीकॉप्टर से उनका पार्थिव शरीर अल्मोड़ा पहुंचा, जहां प्रशासन, सेना के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
दोपहर बाद जब शहीद का पार्थिव शरीर उनके गांव पहुंचा तो पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। सैकड़ों ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े और हर आंख नम दिखाई दी। इसके बाद पार्थिव शरीर को विश्वनाथ घाट ले जाया गया, जहां सैन्य परंपराओं के अनुरूप उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
विश्वनाथ घाट पर भारतीय सेना ने शस्त्र झुकाकर और गार्ड ऑफ ऑनर देकर शहीद अधिकारी को अंतिम सलामी दी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर आर. घोड़के, अपर जिलाधिकारी युक्ता मिश्र तथा सैन्य अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने कहा कि मात्र 25 वर्ष की आयु में राष्ट्र की रक्षा के लिए दिया गया उनका सर्वोच्च बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।
लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी के पिता प्रमोद नाथ गोस्वामी भनोली तहसील में प्रशासनिक अधिकारी हैं, जबकि उनकी माता सरस्वती देवी शिक्षिका हैं। बेटे की शहादत की खबर मिलने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और पूरे क्षेत्र में शोक व्याप्त है।
गौरतलब है कि 6 जून को राजौरी जिले के मंजाकोट क्षेत्र में चल रहे ‘ऑपरेशन शेरोवाली’ के दौरान लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी ड्यूटी के समय एक गहरी खाई में गिर गए थे। घायल अवस्था में उनका रेस्क्यू किया गया, लेकिन उपचार के दौरान उन्होंने वीरगति प्राप्त कर ली।
उनकी शहादत पर भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित कई नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की है। सभी ने उनके बलिदान को साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति का अद्वितीय उदाहरण बताया है।

Chief Editor, Aaj Khabar
