Uttarakhand: उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र में स्थित पवित्र आदि कैलाश यात्रा इस वर्ष पहले से अधिक सुगम और व्यवस्थित हो गई है। भगवान शिव के इस दिव्य धाम तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को अब बेहतर सड़क, सुविधाएं और प्रशासनिक सहयोग का लाभ मिल रहा है, जिससे यात्रा का अनुभव और भी आध्यात्मिक व सहज बन गया है।
Border Roads Organisation (BRO) द्वारा कुँजी से कुटी तक बनाई गई बेहतरीन सड़कें यात्रा को काफी हद तक आसान बना रही हैं। हालांकि गूंजी से आदि कैलाश तक रोड कुछ स्थानों पर अभी भी चुनौतीपूर्ण है, लेकिन इसके बाद का पूरा सफर अत्यंत सुगम बताया जा रहा है।
आधिकारिक रूप से यह यात्रा 1 मई 2026 से आम श्रद्धालुओं के लिए शुरू हो रही है, लेकिन जिला प्रशासन के सहयोग से पत्रकारों को पहले ही इस पवित्र स्थल के दर्शन का अवसर प्राप्त हुआ।
दैनिक आज के ब्यूरो चीफ एवं NUJ(I) कुमाऊं मंडल अध्यक्ष दिनेश जोशी ने बताया कि आदि कैलाश की यात्रा अब काफी सहज और सुगम हो चुकी है। उन्होंने कहा कि यहां पहुंचकर मन को अद्भुत शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक प्रसन्नता प्राप्त होती है।
उन्होने आगे बताया कि आदि कैलाश समुद्र तल से लगभग 5,945 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और यह क्षेत्र प्राचीन काल से धार्मिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि आदि कैलाश को ‘छोटा कैलाश’ भी कहा जाता है और मान्यता है कि यहां भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य निवास है।
इतिहास के अनुसार यह क्षेत्र प्राचीन व्यापार मार्गों और तपस्थली के रूप में भी प्रसिद्ध रहा है, जहां वर्षों से साधु-संत साधना करते आए हैं। यहां स्थित पार्वती कुंड और ओम पर्वत श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था के केंद्र हैं।
इस दौरान BRO द्वारा आदि कैलाश स्थित शिव मंदिर का भव्य उद्घाटन भी किया गया, जिससे श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हो गई है। साथ ही श्रद्धालुओं ने पवित्र पार्वती कुंड में दर्शन कर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की।
बेहतर कनेक्टिविटी, प्रशासनिक सहयोग और दिव्य वातावरण के कारण इस वर्ष आदि कैलाश यात्रा श्रद्धालुओं के लिए एक सुरक्षित, सुगम और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत समृद्ध अनुभव बनकर उभर रही है।

Chief Editor, Aaj Khabar
