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Dehradun: धामी कैबिनेट की बड़ी बैठक: उपनल कर्मियों के लिए सब-कमेटी गठित, आपदा प्रभावितों की मदद राशि में बढ़ोतरी

Dehradun: धामी कैबिनेट की बड़ी बैठक: उपनल कर्मियों के लिए सब-कमेटी गठित, आपदा प्रभावितों की मदद राशि में बढ़ोतरी
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Dehradun: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल बैठक में 12 प्रस्तावों पर मुहर लगी। इस बैठक में कई अहम फैसले लिए गए जिनका सीधा असर प्रदेश के कर्मचारियों और जनता पर पड़ेगा।

सबसे बड़ा निर्णय उपनल कर्मियों के हित में लिया गया है। सरकार ने उनके लिए न्यूनतम वेतनमान और डीए तय करने को लेकर एक सब-कमेटी के गठन का निर्णय लिया है। कमेटी के गठन का अधिकार मुख्यमंत्री को सौंपा गया है और इसे दो महीने में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा उपनल के ओवरसीज एम्प्लॉयमेंट और आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन में संशोधन को मंजूरी दी गई है।

राज्य सरकार ने टेंडर की प्रक्रिया में बैंक गारंटी या एफडीआर के विकल्प के रूप में इंश्योरेंस सिक्योरिटी फॉर्म को भी शामिल करने का निर्णय लिया है।

वहीं, उत्तराखंड बजट राजकोषीय नियोजन एवं संसाधन निदेशालय के ढांचे में संशोधन को मंजूरी दी गई, जिसके तहत आउटसोर्स के माध्यम से एक अतिरिक्त चालक की नियुक्ति की जाएगी।

कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग के तहत सूचना प्रौद्योगिकी विंग गठित करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिली है। इसमें दो कंप्यूटर प्रोग्रामर और दो कंप्यूटर सहायक के पद बनाए जाएंगे।

सरकार ने दैनिक वेतनभोगी, संविदा, नियत वेतन, अंशकालिक और तदर्थ कर्मचारियों के विनियमितिकरण संशोधन नियमावली 2025 को भी मंजूरी दी।

आपदा प्रबंधन विभाग से जुड़ा एक बड़ा निर्णय भी लिया गया। 5 अगस्त 2025 को उत्तरकाशी समेत कई क्षेत्रों में आई आपदा के पीड़ितों के लिए सहायता राशि बढ़ा दी गई है। अब मृतकों के परिजनों को एसडीआरएफ मद से चार लाख की बजाय पांच लाख रुपये मिलेंगे। वहीं पक्के मकानों के ध्वस्त होने पर पर्वतीय क्षेत्रों में पांच लाख और मैदानी क्षेत्रों में 2.80 लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये दिए जाएंगे। कच्चे मकानों के लिए एक लाख रुपये अतिरिक्त मुख्यमंत्री राहत कोष से दिए जाएंगे।

इसके साथ ही स्थानीय निकायों में लोक स्वास्थ्य प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं के लिए पीएमयू (प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट) गठन को भी मंजूरी दी गई है। यह इकाई नगर स्वास्थ्य अधिकारी के कार्यों का पर्यवेक्षण, राज्य और केंद्र से मिलने वाली धनराशि की मॉनिटरिंग, मानव संसाधन प्रबंधन और शहरी स्वास्थ्य योजनाओं की निगरानी करेगी।

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