Pantnagar: गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि भारतीय कृषि इतिहास की उस जीवंत परंपरा का प्रतीक है जिसने देश को आत्मनिर्भरता की दिशा दी। हरित क्रांति के दौर से लेकर आज तक, यह विश्वविद्यालय वैज्ञानिक सोच, किसानों की आवश्यकताओं और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के बीच सेतु बनकर उभरा है। वर्ष 2025 पंतनगर के लिए गतिविधियों का नहीं, बल्कि वैचारिक स्पष्टता, शोध-आधारित निर्णयों और समाजोपयोगी नवाचारों का निर्णायक वर्ष रहा।
इस परिवर्तनशील यात्रा के केंद्र में कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान का नेतृत्व स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। सौम्य व्यवहार, संवादशीलता और निर्णयों में दृढ़ता का संतुलन उनके नेतृत्व की पहचान बना। उनके मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय ने यह सिद्ध किया कि अकादमिक संस्थान यदि शोध को खेत-खलिहान, पशुपालन और ग्रामीण आजीविका से जोड़ दें, तो वे परिवर्तन के प्रभावी केंद्र बन सकते हैं।
वर्ष 2025 में विश्वविद्यालय का शोध कागजों तक सीमित नहीं रहा। आम की नई किस्म ‘सिंदूर’ का विकास इसका उदाहरण है, जो सितंबर–अक्टूबर में पकती है और किसानों को ऑफ-सीजन बेहतर मूल्य का अवसर देती है। इसी तरह जौ की उच्च उपज वाली किस्म पंत जौ 1106 का 12 राज्यों में अधिसूचित होना पंतनगर के शोध के राष्ट्रीय प्रभाव को दर्शाता है।
उत्तराखंड की बद्री गाय के संरक्षण और नस्ल सुधार के लिए क्लोनिंग परियोजना अंतिम चरण में पहुँच चुकी है। यह पहल दुग्ध उत्पादन, पशुपालकों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नई संभावनाएँ खोलती है। साथ ही ‘श्री अन्न अभियान’ के तहत मड़ुआ और झिंगुर जैसे पोषक अनाजों को बढ़ावा देकर विश्वविद्यालय ने पोषण सुरक्षा और पारंपरिक खेती के संरक्षण को भी प्राथमिकता दी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय की पहचान तब और मजबूत हुई जब QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में पंतनगर 311वें से 209वें स्थान पर पहुँचा और देश के कृषि विश्वविद्यालयों में प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि अकादमिक अनुशासन और शोध गुणवत्ता का प्रमाण है।
तकनीकी शिक्षा और उद्योग सहयोग के क्षेत्र में भी 2025 उल्लेखनीय रहा। सेमीकंडक्टर और उन्नत तकनीकों से जुड़ी वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी कर विश्वविद्यालय ने छात्रों को उद्योग-अनुकूल प्रशिक्षण और रोजगार के नए अवसर प्रदान किए। वहीं 10 वर्षों के शोध के बाद विकसित जीवाणुरोधी प्लास्टिक ने स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में नई दिशा दी।
सामाजिक विमर्श में योगदान के लिए पंतनगर को डॉ. अम्बेडकर चेयर का चयन मिलना तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्हाइट टाइगर क्लोनिंग जैसे समझौते विश्वविद्यालय की व्यापक दृष्टि को रेखांकित करते हैं। किसान मेला, बायोटेक्नोलॉजी कॉन्क्लेव और ‘अन्वेषण 2025’ जैसे आयोजनों ने शोध, किसानों और युवाओं को एक साझा मंच पर जोड़ा।
पशुपालन क्षेत्र में पशुओं के लिए फर्स्ट एड किट और स्वदेशी सेक्स्ड सीमेन तकनीक का विकास भी उल्लेखनीय रहा, जिससे डेयरी क्षेत्र को आर्थिक मजबूती मिलने की संभावना है। आईसीएआर के साथ समझौते ने कृषि अनुसंधान और विस्तार गतिविधियों को नई गति दी।
कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान का यह कथन विश्वविद्यालय की दिशा स्पष्ट करता है कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने का केंद्र नहीं, बल्कि किसानों, युवाओं और समाज के उत्थान का इंजन होना चाहिए। वस्तुतः वर्ष 2025 की यात्रा यह सिद्ध करती है कि दूरदर्शी नेतृत्व, समाजोपयोगी सोच और जनकल्याण केंद्रित शोध किसी भी विश्वविद्यालय को परिवर्तन की धुरी बना सकते हैं। पंतनगर विश्वविद्यालय ने नवाचार, शोध और जनकल्याण की जो नई इबारत लिखी है, वह आने वाले वर्षों में पूरे देश के लिए प्रेरणा बनेगी।

Chief Editor, Aaj Khabar
