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Dehradun: दिल्ली में विपक्ष के एसआईआर विरोधी मार्च पर सीएम धामी का तीखा हमला, बोले घुसपैठियों और फर्जी नामों को हटाने से क्यों हो रही परेशानी?

Dehradun: दिल्ली में विपक्ष के एसआईआर विरोधी मार्च पर सीएम धामी का तीखा हमला, बोले घुसपैठियों और फर्जी नामों को हटाने से क्यों हो रही परेशानी?
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Dehradun: विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर देशभर में जारी सियासी घमासान के बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। दिल्ली में विपक्षी सांसदों के निर्वाचन आयोग मुख्यालय की ओर मार्च और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर सीएम धामी ने कांग्रेस पर सवाल खड़े किए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार फरवरी 2025 में मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं, जबकि इससे पहले भी भाजपा और एनडीए लगातार चुनाव जीतते रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है और एसआईआर को लेकर किया जा रहा विरोध राजनीतिक बहानेबाजी है।

सीएम धामी ने कहा कि एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं है। देश में इससे पहले भी कई बार विशेष गहन पुनरीक्षण हो चुका है, लेकिन तब किसी तरह की आपत्ति नहीं जताई गई। उन्होंने कहा कि इस बार मतदाता सूची के शुद्धिकरण और गलत नामों को हटाने के उद्देश्य से प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा रहा है।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी व्यक्ति का नाम कई राज्यों की मतदाता सूची में है या कोई घुसपैठिया है, तो क्या उसे मतदान का अधिकार मिलना चाहिए? धामी ने कहा कि मतदाता सूची को शुद्ध करने की प्रक्रिया पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर एसआईआर जैसी प्रक्रिया पर आपत्ति हो रही है तो इससे कई सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग ऐसे लोगों के सहारे चुनाव को प्रभावित करते रहे हैं और अब मतदाता सूची के शुद्धिकरण की प्रक्रिया से परेशान हैं।

दिल्ली में विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन पर सीएम धामी ने कहा कि देश संविधान, कानून और व्यवस्था के आधार पर चलेगा, न कि हुड़दंगबाजी और माहौल खराब करने से। उन्होंने विपक्ष के ईवीएम को लेकर रवैये पर भी सवाल उठाया और कहा कि चुनाव हारने पर ईवीएम पर सवाल उठाए जाते हैं, जबकि उसी ईवीएम से चुनाव जीतने पर वह सही हो जाती है।

धामी ने कहा कि विपक्ष कभी प्रशासनिक मशीनरी, कभी चुनाव आयोग और कभी दूसरी संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाता है। उन्होंने कहा कि देश देख रहा है कि यह विरोध वास्तव में किस उद्देश्य से किया जा रहा है। उनके मुताबिक विपक्ष चुनाव को प्रभावित करने की अपनी मंशा में सफल नहीं हो पा रहा है, इसलिए एसआईआर को मुद्दा बनाया जा रहा है।

उत्तराखंड में हाल ही में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हुई है। इस दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए थे। अब दिल्ली में विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग के बीच एसआईआर को लेकर सियासी विवाद और तेज होता दिखाई दे रहा है।

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