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Dehradun: उत्तराखंड में कल 11 बजे बजेगा भूकम्प पूर्व चेतावनी का सायरन, घबराने की जरूरत नहीं

Dehradun: उत्तराखंड में कल 11 बजे बजेगा भूकम्प पूर्व चेतावनी का सायरन, घबराने की जरूरत नहीं
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Dehradun: उत्तराखंड में भूकम्प के प्रति आमजन को जागरूक करने और भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली की कार्यप्रणाली जांचने के लिए कल पूर्वाह्न 11 बजे राज्यभर में सायरन बजाया जाएगा। यह सायरन किसी वास्तविक भूकम्प की चेतावनी नहीं होगा, बल्कि प्रणाली के नियमित परीक्षण और जनजागरूकता के उद्देश्य से बजाया जाएगा। सायरन बजने को लेकर भूदेव मोबाइल ऐप के उपयोगकर्ताओं को पहले ही अलर्ट भी प्राप्त हुआ है।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि परीक्षण के माध्यम से लोगों को सायरन की आवाज से परिचित कराया जाएगा, ताकि वास्तविक भूकम्प आने की स्थिति में लोग सायरन को पहचान सकें और घबराने के बजाय आवश्यक सावधानी बरतें। वर्तमान में राज्य में भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के तहत 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित किए गए हैं। परीक्षण के दौरान इनकी कार्यप्रणाली की जांच की जाएगी और किसी स्थान पर तकनीकी समस्या मिलने पर उसे तत्काल दुरुस्त कराया जाएगा।

राज्य में भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली को और मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। सायरन और सेंसरों की संख्या दोगुनी करने तथा करीब 5 से 10 किलोमीटर के अंतराल पर सेंसर और सायरन स्थापित करने की योजना पर कार्य चल रहा है। यूएसडीएमए और आईआईटी रुड़की के सहयोग से अतिरिक्त सेंसर स्थापित करने का प्रस्ताव भी प्रक्रिया में है।

कल होने वाले परीक्षण के दौरान भूदेव मोबाइल ऐप उपयोगकर्ताओं के मोबाइल फोन पर परीक्षण चेतावनी संदेश के साथ वाइब्रेशन और बीप-बीप की आवाज भी सुनाई देगी। आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से भूदेव ऐप का अपडेटेड वर्जन इंस्टॉल या अपडेट रखने और ऐप को लोकेशन की अनुमति हमेशा के लिए देने की अपील की है, ताकि वास्तविक भूकम्प की स्थिति में चेतावनी समय पर प्राप्त हो सके।

यूएसडीएमए ने आमजन से अपील की है कि नियमित परीक्षण के दौरान सायरन सुनकर घबराएं नहीं। प्रत्येक माह की 9 तारीख को पूर्वाह्न 11 बजे होने वाला यह सायरन परीक्षण भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली की जांच और जनजागरूकता का हिस्सा है।

प्राधिकरण ने लोगों से सायरन की आवाज को ध्यान से पहचानने, परिवार के सदस्यों, बच्चों और बुजुर्गों को इसकी जानकारी देने तथा भूकम्प के दौरान सुरक्षित व्यवहार और आपदा प्रबंधन से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने की अपील की है। साथ ही जरूरत पड़ने पर मॉक ड्रिल में सक्रिय भागीदारी करने का अनुरोध किया गया है।

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