Dehradun: उत्तराखंड में लगातार बरामद हो रहे अवैध हथियारों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की जांच में फर्जी शस्त्र लाइसेंस के जरिए संचालित एक बड़े संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि इस रैकेट के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की गई। अब जांच का दायरा उत्तराखंड से निकलकर उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब तक पहुंच चुका है।
एसटीएफ के अनुसार वर्ष 2026 की शुरुआत से राज्यभर में अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त और तस्करी के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। पिछले छह महीनों में एसटीएफ ने 25 हथियार सप्लायरों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 40 अवैध हथियार और 483 कारतूस बरामद किए हैं।
बरामद हथियारों में 21 पिस्टल, 10 तमंचे, पांच ऑटोमैटिक पंप एक्शन गन, दो राइफल और दो रिवॉल्वर शामिल हैं। एसटीएफ की विभिन्न टीमें पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि अवैध हथियारों का कारोबार दो तरीकों से संचालित हो रहा है। पहला, बिना लाइसेंस हथियारों की तस्करी और दूसरा, फर्जी शस्त्र लाइसेंस के माध्यम से कानूनी हथियारों को अवैध रूप से हासिल करना। इसी कारण यह नेटवर्क कई राज्यों की जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गया है।
एसटीएफ की कुमाऊं यूनिट ने हाल ही में फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट के मास्टरमाइंड शाहजहांपुर निवासी सदानंद शर्मा को गिरफ्तार किया था। जांच में आरोपी के बैंक खाते में फर्जी लाइसेंस के कारोबार से लगभग 1.70 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला है।
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि अवैध हथियार रखना और उनका सोशल मीडिया पर प्रदर्शन करना तथा हर्ष फायरिंग में इस्तेमाल करना एक खतरनाक ट्रेंड बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऑल इंडिया शस्त्र लाइसेंस तैयार कर अन्य राज्यों से उन्हें उत्तराखंड में ट्रांसफर कराया जा रहा है, जिसके जरिए अवैध हथियार खरीदे जा रहे हैं। एसटीएफ इस पूरे नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई कर रही है।

Chief Editor, Aaj Khabar
