Dehradun: देहरादून के बिधौली में कॉलेज छात्रों को शराब की होम डिलीवरी कराने वाले नेटवर्क का आबकारी विभाग ने पर्दाफाश किया है। नेटवर्क का संचालन 25 वर्षीय लॉ स्टूडेंट गर्वित उर्फ विक्रांत कर रहा था। आरोपी दिल्ली और हरियाणा से सस्ती शराब लाकर पीजी व हॉस्टल में रहने वाले छात्र-छात्राओं तक इंपोर्टेड शराब पहुंचाता था।
आबकारी विभाग की जांच में सामने आया कि शराब की डिलीवरी के लिए बाकायदा रेट कार्ड तैयार किया गया था, जिसे पीजी और हॉस्टल तक पहुंचाया जाता था। ऑर्डर मिलने के बाद स्कूटी से शराब की डिलीवरी कराई जाती थी। नेटवर्क चलाने के लिए 18 से 25 वर्ष की उम्र के युवाओं को करीब 15 हजार रुपये मासिक वेतन पर रखा गया था।
डिलीवरी करने वाले युवाओं का एक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया गया था। इसी ग्रुप में डिलीवरी लोकेशन, शराब की सप्लाई और पैसों के लेनदेन से जुड़ी जानकारी साझा की जाती थी। डिलीवरी कर्मचारी सुबह और शाम सेल्फी भेजकर अपनी हाजिरी भी लगाते थे। ग्रुप को गर्वित उर्फ विक्रांत लीड करता था।
25 अगस्त की रात आबकारी विभाग की टीम ने बिधौली क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए एक कार और तस्करी में इस्तेमाल दो स्कूटी कब्जे में ली थीं। वाहनों से भारी मात्रा में शराब बरामद हुई थी और दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में गर्वित उर्फ विक्रांत का नाम सामने आया, जिसे जांच में नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया गया।
आबकारी विभाग ने उसके खिलाफ आबकारी अधिनियम की गैर-जमानती धाराओं 63/72 में मुकदमा दर्ज किया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की, लेकिन राहत नहीं मिलने के बाद 7 अक्टूबर को सीजेएम कोर्ट में सरेंडर कर दिया। कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया।
जांच के दौरान आबकारी टीम ने गर्वित के एक अन्य ठिकाने पर छापा मारकर उसकी मां को भी शराब के जखीरे के साथ गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में आदित्य का नाम सामने आया। अब गुरुवार सुबह बिधौली में किराए के कमरे पर छापा मारकर आदित्य को करीब 10 पेटी इंपोर्टेड शराब के साथ गिरफ्तार किया गया है।
विभाग के मुताबिक, अब तक तीन स्कूटी और एक कार बरामद की जा चुकी हैं। आरोप है कि इन वाहनों को विक्रांत ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर पंजीकृत कराया था।
जांच में सामने आया कि मूल रूप से हरियाणा निवासी गर्वित वर्ष 2022 में देहरादून की एक निजी यूनिवर्सिटी में लॉ की पढ़ाई करने आया था। आरोप है कि पढ़ाई के साथ उसने शराब तस्करी शुरू की और धीरे-धीरे अपना नेटवर्क खड़ा कर लिया। बाद में उसने बिधौली क्षेत्र में तीन कैफे भी शुरू किए और परिवार के साथ देहरादून में रहने लगा।
आबकारी निरीक्षक दिवाकर चौधरी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी प्रतिदिन करीब 20 से 25 पेटी इंपोर्टेड शराब की बिक्री करता था। विभाग को आशंका है कि इस नेटवर्क के कारण सरकार को सालाना 5 से 10 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा था। मामले में नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
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Chief Editor, Aaj Khabar
