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Dehradun: उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में चार प्रस्तावों को मिली मंजूरी, धार्मिक पर्यटन को लेकर भी चर्चा

Dehradun: उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में चार प्रस्तावों को मिली मंजूरी, धार्मिक पर्यटन को लेकर भी चर्चा
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Dehradun: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक संपन्न हो गई। बैठक में कुल चार महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मंजूरी प्रदान की गई। बैठक के बाद सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने मीडिया को संबोधित करते हुए इन प्रस्तावों की जानकारी दी।

कैबिनेट बैठक के दौरान प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों और मंदिरों में बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या पर विशेष चर्चा हुई। सरकार का उद्देश्य है कि चारधाम समेत प्रदेश के अन्य प्रसिद्ध और पौराणिक मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की संख्या को बढ़ावा दिया जाए।

पर्यटन विभाग द्वारा बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार, रुद्रप्रयाग जनपद स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर में इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में चार गुना वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, अल्मोड़ा जिले के जागेश्वर मंदिर में वर्ष 2024 में लगभग चार लाख श्रद्धालु पहुंचे थे, जबकि इस वर्ष अब तक छह लाख श्रद्धालु यहां दर्शन कर चुके हैं। इसी तरह, उत्तरकाशी जिले के साल्ड गांव स्थित जगन्नाथ मंदिर में भी श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय इजाफा देखा गया है।

मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत चार प्रमुख प्रस्ताव इस प्रकार हैं:

  1. उप निबंधक ऑडिट पद सृजन को मंजूरी: कैबिनेट ने उप निबंधक ऑडिट का एक पद सृजित करने को स्वीकृति दी है। यह पद अगले पांच वर्षों के लिए भरा जाएगा और कोऑपरेटिव सोसायटी का ऑडिट कार्य करेगा।
  2. बदरीनाथ धाम में आर्टवर्क को स्वीकृति: बदरीनाथ धाम स्थित आईएसबीटी की दीवार पर धार्मिक और सांस्कृतिक आर्टवर्क तैयार किए जाने के प्रस्ताव को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है।
  3. ‘गंगा गाय योजना’ और अनुसूचित जाति योजना का विलय: पशुपालन विभाग में अनुसूचित जाति वर्ग को 90 प्रतिशत सब्सिडी पर गाय प्रदान करने की योजना और सामान्य वर्ग के लिए डेयरी विभाग द्वारा संचालित ‘गंगा गाय योजना’ को मर्ज कर एक नई संयुक्त योजना लागू करने का निर्णय लिया गया है।
  4. पशुधन प्रसार अधिकारी की ट्रेनिंग अवधि में कटौती: पशुपालन विभाग में पशुधन प्रसार अधिकारी के 429 रिक्त पदों को भरने के लिए प्रशिक्षण अवधि को दो वर्ष से घटाकर एक वर्ष कर दिया गया है। इससे चयन प्रक्रिया के बाद अधिकारी शीघ्र नियुक्त किए जा सकेंगे।

सरकार का मानना है कि इन निर्णयों से प्रदेश में धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ पशुपालन एवं सहकारिता क्षेत्रों को भी नई दिशा मिलेगी।

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