Dehradun: संसद में महिला आरक्षण विधेयक का गिरना देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के रूप में देखा जा रहा है। उत्तराखंड कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. गणेश उपाध्याय ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि कांग्रेस सहित विपक्ष ने महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की कथित भ्रामक और असंवैधानिक मंशा के विरोध में मतदान किया है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी शुरू से ही महिला आरक्षण की प्रबल समर्थक रही है और महिलाओं को बिना किसी शर्त एवं बिना देरी के तत्काल आरक्षण देने की पक्षधर है। पार्टी का मानना है कि महिला आरक्षण किसी भी प्रकार के राजनीतिक गणित का हिस्सा नहीं होना चाहिए, बल्कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ठोस और निर्णायक कदम होना चाहिए।
डॉ. उपाध्याय ने 2023 में संसद के दोनों सदनों में पारित ऐतिहासिक महिला आरक्षण विधेयक का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे जनगणना और परिसीमन के बाद लागू किया जाना था। इस दौरान राहुल गांधी ने भी स्पष्ट रूप से कहा था कि यदि 2023 का बिल लागू किया जाए, तो पूरा विपक्ष सरकार के साथ खड़ा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस विधेयक को लागू करने में देरी कर रही है, ताकि आगामी 2029 के चुनावों में इसे राजनीतिक लाभ के रूप में इस्तेमाल किया जा सके। कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि महिला आरक्षण तुरंत लागू किया जाना चाहिए, जिसमें ओबीसी महिलाओं के लिए भी स्पष्ट प्रावधान सुनिश्चित हो।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी निर्णय में जनगणना और सामाजिक न्याय के वास्तविक आंकड़ों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। डॉ. उपाध्याय ने कहा कि आज की स्थिति यह दर्शाती है कि सरकार महिलाओं के नाम पर राजनीति कर रही है, जबकि कांग्रेस महिलाओं के वास्तविक सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
कांग्रेस ने देश की आधी आबादी को भरोसा दिलाया है कि वह उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी।

Chief Editor, Aaj Khabar
