Nainital: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने रामनगर के बैलपड़ाव में प्रतिबंधित मांस के शक में पुलिस चौकी परिसर में लोडर वाहन पर हुई तोड़फोड़ के मामले में पुलिस की निष्क्रियता पर गहरी नाराज़गी व्यक्त की है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंदर और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने वीडियो फुटेज देखने के बाद पूछा कि जब आरोपियों के चेहरे स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं तो अब तक उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। अदालत ने इस लापरवाही के लिए बैलपड़ाव चौकी प्रभारी और कालाढूंगी कोतवाली प्रभारी निरीक्षक के खिलाफ जांच के आदेश दिए।
मामले में पहले एक वाहन चालक की पत्नी ने सुरक्षा की गुहार लगाई थी, वहीं अब दूसरे वाहन के मालिक अलशिफा ट्रेडिंग कंपनी ने भी हाईकोर्ट से सुरक्षा की मांग की है। अदालत ने यह जांचने को कहा कि कहीं यह घटना व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा का परिणाम तो नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला वैचारिक नहीं बल्कि व्यापारिक प्रतिद्वंद्विता से जुड़ा प्रतीत होता है।
अदालत ने इस प्रकरण को उसी दिन छोई गांव में हुई मॉब लिंचिंग से जोड़ते हुए लोडर चालक नासिर की पत्नी नूरजहां की याचिका पर पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। खंडपीठ ने निर्देश दिया कि यदि कोई ट्रांसपोर्टर वैध मांस ले जाने की सूचना पहले से देता है, तो पुलिस उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करे। साथ ही, उस झूठे मुखबिर का भी पता लगाया जाए जिसने भीड़ को भड़काया था।
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि पुलिस की मौजूदगी में कानून व्यवस्था भंग होना गंभीर लापरवाही है, और ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अनिवार्य है।

Chief Editor, Aaj Khabar
