New Delhi: दिल्ली की राजनीति के बहुचर्चित आबकारी घोटाला मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सीबीआई द्वारा दर्ज केस में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बरी कर दिया है। स्पेशल जज जीतेंद्र सिंह ने आदेश देते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल रहा और किसी आपराधिक साजिश का ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सीबीआई की चार्जशीट पर गंभीर सवाल उठाए। न्यायालय ने टिप्पणी की कि प्रस्तुत दस्तावेज चार्जशीट से मेल नहीं खाते। साथ ही “साउथ ग्रुप” जैसे शब्दों के उपयोग पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसे शब्दों का इस्तेमाल उचित नहीं है। अदालत ने सवाल किया कि यदि यही चार्जशीट किसी अन्य राज्य में दाखिल होती तो क्या इसी तरह के शब्दों का प्रयोग किया जाता?
सुनवाई के दौरान केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई पुख्ता साक्ष्य नहीं है और वे सरकारी कार्यों का निर्वहन कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआती तीन चार्जशीट में केजरीवाल का नाम नहीं था, बल्कि चौथी पूरक चार्जशीट में उनका नाम जोड़ा गया।
सीबीआई ने इस मामले में केजरीवाल और सिसोदिया समेत कुल 23 लोगों को आरोपी बनाया था। अदालत ने 12 फरवरी को आरोप तय करने पर फैसला सुरक्षित रखा था, जिसके बाद अब दोनों नेताओं को बरी कर दिया गया है। फैसले के बाद मीडिया के सामने केजरीवाल भावुक नजर आए।
मामले की प्रमुख समयरेखा
21 मार्च 2024 को प्रवर्तन निदेशालय ने पूछताछ के बाद अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया था। 10 मई 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 1 जून तक अंतरिम जमानत दी थी, जिसके बाद 2 जून को उन्होंने सरेंडर किया। 26 जून 2024 को सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार किया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 12 जुलाई 2024 को ईडी मामले में अंतरिम जमानत और 13 सितंबर 2024 को सीबीआई मामले में नियमित जमानत दी।
ईडी ने 10 मई 2024 को छठी पूरक चार्जशीट दाखिल की थी, जिस पर 29 मई को संज्ञान लिया गया। 27 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने बीआरएस नेता के. कविता को भी सीबीआई और ईडी मामलों में जमानत प्रदान की थी।

Chief Editor, Aaj Khabar
