Rudrapur: उत्तराखंड में NEET UG के बाद MBBS में प्रवेश के लिए फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने के मामलों के तार अब ऊधम सिंह नगर जिले के गदरपुर तक पहुंच गए हैं। गदरपुर तहसील क्षेत्र में कूटरचित अभिलेखों के आधार पर स्थायी निवास, जाति और अन्य प्रमाण पत्र बनवाने का मामला सामने आया है। प्रशासन ने जांच के बाद पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर संबंधित प्रमाण पत्र निरस्त करने की कार्रवाई की है।
प्रशासन के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर तैयार कराए गए प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल देहरादून में NEET के बाद MBBS में प्रवेश लेने के उद्देश्य से किया जाना था। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने संबंधित अभिलेखों और प्रमाण पत्रों का सत्यापन शुरू किया।
गदरपुर की एसडीएम डॉ. अमृता शर्मा के मुताबिक, जांच में कुछ व्यक्तियों द्वारा कूटरचित अभिलेखों के आधार पर सरकारी प्रमाण पत्र तैयार करवाने की जानकारी सामने आई। जांच में यह भी पाया गया कि इन प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल MBBS में प्रवेश के लिए किया जाना था।
प्रशासन ने अब तक पांच व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की है। कूटरचित अभिलेखों के आधार पर जारी स्थायी निवास और अनाथ प्रमाण पत्र निरस्त कर दिए गए हैं, जबकि जाति प्रमाण पत्रों के संबंध में नियमानुसार जिला स्क्रूटनी समिति को संस्तुति भेजी गई है।
जांच के दौरान निखिल वर्मा और शुभम हुडिया, निवासी गदरपुर, की भूमिका सामने आने पर दोनों से गहन पूछताछ की गई। उनके बयान दर्ज करने के साथ दोनों के मोबाइल फोन भी जब्त किए गए। प्रशासन के अनुसार, मोबाइल फोन में मामले से संबंधित रिकॉर्डिंग और दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई है। दोनों मोबाइल फोन को आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के लिए पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है।
प्रशासन अब इस मामले से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मामले को लेकर कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र पाल सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मांग की कि जांच केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित न रखते हुए पटवारी से लेकर संबंधित अधिकारियों तक सभी स्तरों पर की जाए। उन्होंने कहा कि इस तरह की अनियमितताओं से NEET में अच्छे अंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
प्रशासन की कार्रवाई उपजिलाधिकारी डॉ. अमृता शर्मा, तहसीलदार लीना चंद्रा धामी, राजस्व निरीक्षक विनोद कुमार सहित संबंधित राजस्व कर्मियों और पटवारियों की मौजूदगी में की गई। बताया गया कि अभिलेखों की जांच और संबंधित लोगों से पूछताछ की कार्रवाई देर रात से शुरू होकर सुबह करीब तीन बजे तक चली।
एसडीएम डॉ. अमृता शर्मा ने स्पष्ट किया कि कूटरचित अभिलेख तैयार कर सरकारी प्रमाण पत्र प्राप्त करने या उनके आधार पर अनुचित लाभ लेने वालों के खिलाफ नियमानुसार कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

Chief Editor, Aaj Khabar
