Rishikesh: परमार्थ निकेतन में 22 जुलाई को राष्ट्रीय ध्वज दिवस गरिमापूर्ण ढंग से मनाया गया, जहां भारत के तिरंगे को सम्मान और श्रद्धा के साथ नमन करते हुए देशभक्ति की भावना को सशक्त किया गया। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने तिरंगे के महत्व और उसके गहरे राष्ट्रीय भाव को विस्तार से समझाया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि भारत माता का मुकुट और उन शहीदों की अंतिम साँस है जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण अर्पित कर दिए। उन्होंने बताया कि तिरंगे के केसरिया रंग में साहस और बलिदान, श्वेत रंग में शांति और सत्य, हरे रंग में समृद्धि और विकास, तथा अशोक चक्र में धर्म और निरंतर प्रगति की प्रेरणा समाहित है।
ध्वज दिवस पर परमार्थ निकेतन के ऋषिकुमारों, आचार्यों और स्वामी जी ने तिरंगा फहराकर देश के प्रति अपने कर्तव्यों और प्रतिबद्धता का संदेश दिया। गंगा आरती के दौरान तिरंगे को लहराकर देवभक्ति और देशभक्ति का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया गया।
अपने संबोधन में स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने युवाओं का विशेष रूप से आह्वान करते हुए कहा कि “हर घर तिरंगा तो हुआ, अब हर दिल तिरंगा होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि तिरंगे का सच्चा सम्मान तब होगा जब हमारे विचार, आचरण और उद्देश्य राष्ट्रहित में होंगे।
स्वामी जी ने राष्ट्रीय ध्वज दिवस को केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा दिखाने वाला प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि तिरंगा हमें हमारी एकता, जिम्मेदारी और देश के प्रति समर्पण का बोध कराता है।
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Chief Editor, Aaj Khabar

