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Chamoli: शीतकाल के लिए बंद हुए चतुर्थ केदार रुद्रनाथ मंदिर के कपाट, गोपीनाथ मंदिर पहुंचेगी भगवान की डोली

Chamoli: शीतकाल के लिए बंद हुए चतुर्थ केदार रुद्रनाथ मंदिर के कपाट, गोपीनाथ मंदिर पहुंचेगी भगवान की डोली
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Chamoli: पंचकेदारों में शामिल चतुर्थ केदार रुद्रनाथ महादेव मंदिर के कपाट आज ब्रह्म मुहूर्त में पूर्ण वैदिक विधि-विधान के साथ शीतकाल हेतु बंद कर दिए गए। मंदिर के मुख्य पुजारी ने अंतिम पूजा-अर्चना संपन्न की, जिसके दौरान पूरा परिसर ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष पुनः यात्रा आरंभ होने की कामना के साथ भगवान रुद्रनाथ के दर्शन किए।

कपाट बंद होने के उपरांत भगवान रुद्रनाथ जी की उत्सव डोली अपनी शीतकालीन गद्दीस्थल श्री गोपीनाथ मंदिर, गोपेश्वर के लिए रवाना हुई। आगामी छह माह तक भक्तजन भगवान रुद्रनाथ के दर्शन गोपीनाथ मंदिर में कर सकेंगे। लगभग 11,808 फीट की ऊँचाई पर स्थित इस धाम तक पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं को बुग्यालों से होते हुए 19 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई तय करनी पड़ती है।

सुबह चार बजे से पूजाएं प्रारंभ हुईं और प्रातः छह बजे मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। डोली साढ़े सात बजे रुद्रनाथ से प्रस्थान कर पंच गंगा, पितृधार, पनार और मोली बुग्याल मार्ग से सगर गाँव होते हुए गोपेश्वर पहुंचेगी, जहाँ भगवान को नए अनाजों का भोग लगाया जाएगा। छह माह तक भगवान रुद्रनाथ की डोली गोपीनाथ मंदिर परिसर में विराजमान रहेगी।

पुजारी सुनील तिवारी ने बताया कि कपाट बंद होने पर भगवान को मंदार (बुखला) के 251 पुष्प गुच्छों से ढका जाता है, जिन्हें कपाट खुलने पर प्रसाद स्वरूप वितरित किया जाता है। उच्च हिमालयी रुद्रनाथ धाम में भगवान शिव के एकानन (मुख) की पूजा होती है, जबकि संपूर्ण शरीर की पूजा नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में संपन्न होती है।

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