Champawat: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में रविवार को चंपावत जिले के बनबसा स्थित एनएचपीसी में मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित की गई। यह पहली बार है जब उत्तराखंड की कैबिनेट बैठक देहरादून से बाहर चंपावत जिले में हुई। बैठक में मुख्यमंत्री समेत कैबिनेट मंत्री और शासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
कैबिनेट बैठक के लिए मुख्यमंत्री, मंत्रियों और अधिकारियों का बनबसा पहुंचने का कार्यक्रम पहले ही तय कर लिया गया था। बैठक अक्टूबर महीने की पहली कैबिनेट बैठक रही। वहीं, इसी महीने 26 अक्टूबर से पहले विधानसभा का मॉनसून सत्र भी प्रस्तावित है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अब कैबिनेट बैठकें केवल देहरादून तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में भी आयोजित की जाएंगी। इससे स्थानीय समस्याओं, विकास की संभावनाओं और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को सीधे शासन के सामने रखने का अवसर मिलेगा।
सीएम धामी ने कहा कि सीमांत क्षेत्र राज्य की भौगोलिक सीमा के साथ-साथ सुरक्षा, संस्कृति और विकास की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। सरकार की प्राथमिकता सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके लिए आधारभूत सुविधाओं, रोजगार, पर्यटन और कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य शासन को जनता के और करीब ले जाना है। अलग-अलग क्षेत्रों में कैबिनेट बैठकें होने से स्थानीय परिस्थितियों और जन अपेक्षाओं को बेहतर ढंग से समझने तथा विकास से जुड़े मामलों पर त्वरित निर्णय लेने में मदद मिलेगी। सरकार सीमांत गांवों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक संतुलित विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि चंपावत में कैबिनेट बैठक आयोजित करना सरकार का अच्छा फैसला है। सरकार का लगातार प्रयास रहा है कि सीमांत जिलों और बॉर्डर क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि बैठक से स्थानीय लोगों को यह संदेश जाएगा कि सरकार उनके प्रति संवेदनशील है और पर्वतीय जिलों के विकास पर पूरा फोकस कर रही है।
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि बनबसा में कैबिनेट बैठक होने से स्थानीय लोगों में काफी उत्साह है। लोगों में यह भावना पैदा हुई है कि सरकार उनके बीच पहुंची है। मुख्यमंत्री धामी द्वारा चंपावत में कैबिनेट बैठक आयोजित करने का फैसला अच्छा संदेश देने वाला है।

Chief Editor, Aaj Khabar

