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Dehradun: देहरादून पुलिस ने महिला असुरक्षा सर्वे के आरोपों का किया खंडन, प्रेस कॉन्फ्रेंस में रखे सुरक्षा के ठोस आंकड़े और दावे, देखें प्रेस कॉन्फ्रेंस हाइलाइट्स

Dehradun: देहरादून पुलिस ने महिला असुरक्षा सर्वे के आरोपों का किया खंडन, प्रेस कॉन्फ्रेंस में रखे सुरक्षा के ठोस आंकड़े और दावे, देखें प्रेस कॉन्फ्रेंस हाइलाइट्स
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Dehradun:  हाल ही में एक निजी सर्वे कंपनी “पी वैल्यू एनालिटिक्स” द्वारा जारी NARI-2025 रिपोर्ट में देहरादून को देश के 10 असुरक्षित शहरों में शामिल किए जाने पर देहरादून पुलिस ने कड़ी आपत्ति जताई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह सर्वे न तो राष्ट्रीय महिला आयोग और न ही राज्य महिला आयोग से अधिकृत है, बल्कि मात्र व्यक्तिगत धारणाओं और सीमित सैम्पल पर आधारित है।

पुलिस के अनुसार, देहरादून में लगभग नौ लाख महिला आबादी की तुलना में केवल 400 महिलाओं से टेलीफोनिक बातचीत कर निष्कर्ष निकाला गया, जो वास्तविकता से मेल नहीं खाता। रिपोर्ट में महिला सुरक्षा एप और तकनीकी सुविधाओं के कम इस्तेमाल का दावा किया गया है, जबकि सिर्फ “गौरा शक्ति एप” पर ही 1.25 लाख से अधिक महिलाएं रजिस्टर्ड हैं।

Source:- ANI

देहरादून पुलिस ने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि अगस्त माह में प्राप्त 12,354 शिकायतों में से मात्र 1% शिकायतें छेड़छाड़ या लैंगिक हमलों से संबंधित थीं। पुलिस का औसत रिस्पांस टाइम 13.33 मिनट दर्ज किया गया है। इसके अलावा, महिला सुरक्षा हेतु गौरा चीता पेट्रोलिंग, पिंक बूथ, सीसीटीवी नेटवर्क और वन स्टॉप सेंटर जैसी व्यवस्थाएं सक्रिय हैं।

पुलिस ने कहा कि देहरादून सदैव सुरक्षित शहरों में गिना जाता है। यहां 70 हजार से अधिक बाहरी छात्र-छात्राएं, जिनमें विदेशी छात्र भी शामिल हैं, सुरक्षित वातावरण में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बढ़ती छात्र एवं पर्यटक संख्या इस बात का प्रमाण है कि शहर महिलाओं व आगंतुकों के लिए सुरक्षित है।

देहरादून पुलिस ने स्पष्ट किया कि नीतिगत निर्णयों के लिए किसी भी सर्वे की पद्धति वैज्ञानिक और तथ्यात्मक होनी चाहिए, ताकि उसके निष्कर्ष विश्वसनीय बन सकें। निजी सर्वे में देहरादून को असुरक्षित शहर बताना वास्तविक आंकड़ों और जमीनी हकीकत से परे है।

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