॰ रावत के साथ प्रीतम सिंह और कुंजवाल समेत कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी से बढ़ी सियासी हलचल
॰ यात्रा को लेकर कांग्रेस में दो अलग-अलग नजरिए, संगठन ने बताया हाईकमान और रावत के बीच का मामला
Uttarakhand: उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की ‘धन्यवाद एवं जन संवाद यात्रा’ कांग्रेस के भीतर चर्चा और संगठनात्मक मतभेद का मुद्दा बन गई है। प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा की ओर से यात्रा और कार्यक्रमों को लेकर आपत्ति जताए जाने के बावजूद हरीश रावत ने अपना जनसंवाद अभियान जारी रखा है। ऐसे में कांग्रेस के भीतर नेतृत्व, संगठनात्मक समन्वय और आगामी चुनावी रणनीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हरीश रावत ने हरिद्वार से अपनी यात्रा की शुरुआत की। इसके बाद जसपुर, काशीपुर, रामनगर और कालाढूंगी होते हुए हल्द्वानी तक कार्यक्रम आयोजित किए गए। रावत ने इसे बीमारी से उबरने के बाद समर्थकों और शुभचिंतकों का आभार जताने तथा जनता से संवाद करने की पहल बताया है। हालांकि, यात्रा के दौरान सरकार पर निशाना साधने और कांग्रेस को आगामी चुनाव में मजबूत करने की अपील ने इसे राजनीतिक रूप भी दे दिया है।
कांग्रेस में यात्रा को लेकर विवाद तब बढ़ा जब प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने एक अक्टूबर को हरीश रावत को पत्र लिखकर कार्यक्रमों की जानकारी प्रदेश कांग्रेस कमेटी और उन्हें नहीं दिए जाने पर आपत्ति जताई। सैलजा ने चुनाव के नजदीक आने का हवाला देते हुए पार्टी को एकजुट होकर जनता के बीच जाने की जरूरत बताई और समानांतर कार्यक्रमों को लेकर चिंता जाहिर की।
इसके बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी हरीश रावत से मुलाकात की। वहीं, सैलजा के मुताबिक हरीश रावत 7 या 8 अक्टूबर को अपना स्पष्टीकरण दे सकते हैं।
रावत की यात्रा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने भी राजनीतिक चर्चा को बढ़ा दिया है। जसपुर चरण में पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह, पूर्व अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल समेत कई नेताओं की मौजूदगी दिखाई दी। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या रावत की सक्रियता केवल व्यक्तिगत जनसंपर्क अभियान है या इसके जरिए वह चुनाव से पहले अपनी राजनीतिक भूमिका को लेकर संदेश दे रहे हैं।
वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत के मुताबिक, हरीश रावत प्रदेश कांग्रेस में अपनी राजनीतिक भूमिका और प्रभाव को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार टिकट वितरण, चुनावी रणनीति और संगठन में भूमिका तय होने से पहले अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन भी यात्रा का एक उद्देश्य माना जा सकता है। हालांकि, परिवार के सदस्यों को टिकट दिलाने के लिए यात्रा किए जाने की चर्चाओं की कोई सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है।
कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री संगठन राजेंद्र भंडारी ने कहा कि हरीश रावत लंबे समय से अस्वस्थ थे और स्वस्थ होने के बाद कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए उन्होंने कार्यक्रम किए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से रावत के इन कार्यक्रमों का कोई आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं हुआ था। भंडारी ने इसे पार्टी हाईकमान और हरीश रावत के बीच का मामला बताया।
कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने भी रावत के लंबे राजनीतिक अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी के नियम और अनुशासन से वह भलीभांति परिचित हैं। उनके मुताबिक रावत अपने अनुभव और विवेक से आगे का निर्णय लेंगे।
वहीं, प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने कहा है कि हरीश रावत से स्पष्टीकरण मांगा गया है और वह 7 या 8 अक्टूबर को अपनी बात रख सकते हैं। इसके बाद पार्टी आगे की स्थिति पर निर्णय लेगी।
उधर, बीजेपी ने कांग्रेस के अंदर चल रही इस खींचतान को लेकर निशाना साधा है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि कांग्रेस में गुटबाजी पहले से थी और अब यह खुलकर सामने आ गई है। उन्होंने कांग्रेस के भीतर अलग-अलग नेताओं के खेमों का जिक्र करते हुए दावा किया कि चुनाव नजदीक आने के साथ यह खींचतान और बढ़ सकती है।
महेंद्र भट्ट ने हरीश रावत को सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की सलाह भी दी। हालांकि, यह बीजेपी नेता का राजनीतिक बयान है और कांग्रेस की ओर से इस पूरे विवाद पर अंतिम स्थिति हरीश रावत के स्पष्टीकरण और पार्टी नेतृत्व के अगले कदम के बाद ही स्पष्ट होगी।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में संगठनात्मक एकजुटता और चुनावी रणनीति का समन्वय शामिल है। ऐसे में हरीश रावत की यात्रा ने प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व और राजनीतिक भूमिका को लेकर चल रही चर्चाओं को फिर तेज कर दिया है। अब नजर इस बात पर है कि 7 या 8 अक्टूबर को हरीश रावत अपना पक्ष रखने के बाद पार्टी हाईकमान क्या रुख अपनाता है और इस यात्रा को लेकर कांग्रेस के भीतर आगे क्या रणनीति बनती है।

Chief Editor, Aaj Khabar
