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Dehradun: चार साल में ‘विकास और विरासत’ का मॉडल बना उत्तराखण्ड, निवेश से लेकर पर्यटन तक नए कीर्तिमान स्थापित

Dehradun: चार साल में ‘विकास और विरासत’ का मॉडल बना उत्तराखण्ड, निवेश से लेकर पर्यटन तक नए कीर्तिमान स्थापित
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Dehradun: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड ने बीते चार वर्षों में विकास और सांस्कृतिक विरासत के संतुलन का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया है, जिसने राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। यह दौर केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, पर्यटन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में ठोस उपलब्धियों के साथ परिणाम सामने आए हैं।

राज्य में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के दौरान ₹3.56 लाख करोड़ के एमओयू साइन हुए, जिनमें से ₹1 लाख करोड़ से अधिक का निवेश धरातल पर उतर चुका है। इससे उत्तराखण्ड में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिली है और रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में नैनीताल जिले की जमरानी बांध परियोजना और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का निर्माण तेजी से प्रगति पर है। साथ ही, दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड परियोजना भी जल्द शुरू होने की कगार पर है, जिससे राज्य की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।

स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए ऊधमसिंह नगर के किच्छा में एम्स सैटेलाइट सेंटर का निर्माण कार्य जारी है। वहीं, ऋषिकेश में राफ्टिंग बेस स्टेशन विकसित करने की योजना पर्यटन को नई दिशा देगी।

कनेक्टिविटी के क्षेत्र में उड़ान योजना के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में हेली सेवाओं का संचालन शुरू किया गया है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच आसान हुई है। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अंतर्गत चयनित गांवों में ₹270 करोड़ की लागत से करीब 200 विकास कार्यों पर काम जारी है। इसके साथ ही, 13 जिलों में 13 आदर्श संस्कृत ग्रामों की शुरुआत भी सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में अहम कदम है।

औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ऊधमसिंह नगर के खुरपिया फार्म में स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप को स्वीकृति मिली है, जबकि टनकपुर-बागेश्वर रेललाइन को राष्ट्रीय परियोजना घोषित कराने के प्रयास जारी हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखण्ड, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज की स्थापना और स्कूलों में श्रीमद् भगवद् गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय, सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पर्यटन के क्षेत्र में राज्य ने नए रिकॉर्ड स्थापित किए हैं। वर्ष 2025 में 6.03 करोड़ से अधिक पर्यटक उत्तराखण्ड पहुंचे, जबकि चारधाम यात्रा में लगभग 48 लाख श्रद्धालु शामिल हुए। कांवड़ यात्रा में 4.15 करोड़ से अधिक शिवभक्तों की भागीदारी रही, जो राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाता है।

नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी उत्तराखण्ड ने उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य की सौर ऊर्जा क्षमता 1 गीगावाट से अधिक पहुंच चुकी है और यूपीसीएल द्वारा 42,000 से अधिक सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित किए गए हैं।

खेलों के क्षेत्र में उत्तराखण्ड ने पहली बार राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी की और राज्य के खिलाड़ियों ने 103 पदक जीतकर नया रिकॉर्ड बनाया।

राष्ट्रीय स्तर पर भी उत्तराखण्ड का प्रदर्शन सराहनीय रहा है। नीति आयोग के निर्यात तैयारी सूचकांक 2024 में राज्य ने छोटे राज्यों की श्रेणी में प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि एसडीजी इंडेक्स 2023-24 में भी उत्तराखण्ड शीर्ष पर रहा।

Ease of Doing Business में “Achievers” और स्टार्टअप रैंकिंग में “Leaders” श्रेणी प्राप्त करना राज्य की निवेश-अनुकूल नीतियों को दर्शाता है। वहीं, Wings India 2026 में “Best State for Promotion of Aviation Ecosystem” पुरस्कार और खनन सुधारों में दूसरा स्थान प्राप्त कर ₹200 करोड़ की प्रोत्साहन राशि हासिल करना भी बड़ी उपलब्धि रही।

ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जखोल, सूपी, हर्षिल और गुंजी गांवों को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम के रूप में सम्मानित किया गया है।

कुल मिलाकर, “विकास भी, विरासत भी” के मूल मंत्र के साथ उत्तराखण्ड ने बीते चार वर्षों में बहुआयामी प्रगति का नया अध्याय लिखा है। यह दौर राज्य के लिए न केवल विकास का प्रतीक बना है, बल्कि एक सशक्त और आत्मनिर्भर भविष्य की दिशा में मजबूत कदम के रूप में भी देखा जा रहा है।

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