Nainital: जिले में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जिला मजिस्ट्रेट ललित मोहन रयाल की न्यायालय ने गुंडा नियंत्रण कानून के तहत आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाए गए छह व्यक्तियों को छह माह के लिए जिला बदर करने के आदेश पारित किए हैं।
जिला मजिस्ट्रेट ललित मोहन रयाल ने बताया कि आसिफ पुत्र सिराजुद्दीन रहमान निवासी मेडिकल गली, बनभूलपुरा के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के कई मामले दर्ज हैं। इसी प्रकार इरफान उर्फ शक्ति पुत्र मेहंदी हसन निवासी गफूर बस्ती तथा अरशद अली पुत्र स्वर्गीय असगर अली निवासी शनिबाजार गेट, थाना बनभूलपुरा के विरुद्ध भी एनडीपीएस एक्ट के कई मामलों के आधार पर कार्रवाई की गई।
शाहनवाज पुत्र अशरफ निवासी इंदिरा नगर, बनभूलपुरा के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट, चोरी और आर्म्स एक्ट से संबंधित कई मामले दर्ज हैं। वहीं राहुल बिष्ट उर्फ राहुल थापा पुत्र वीर बहादुर निवासी गोकुल नगर, थाना काठगोदाम के विरुद्ध आर्म्स एक्ट, चोरी और जुआ अधिनियम से जुड़े आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। इन सभी के विरुद्ध छह माह के लिए जिला बदर के आदेश जारी किए गए हैं।
जेल में बंद तीन आरोपियों के मामले समाप्त
जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय नैनीताल ने परिस्थितियों को देखते हुए गुंडा नियंत्रण कानून के तहत चल रही कुछ न्यायालयीन कार्रवाइयों को समाप्त करने के आदेश भी दिए हैं।
अमन गुप्ता पुत्र सीताराम निवासी लालकुआं, शेखर आर्य उर्फ चंद्रशेखर पुत्र आनंद प्रसाद निवासी गोलापार, काठगोदाम तथा मिराज पुत्र मोहम्मद हनीफ निवासी बनभूलपुरा वर्तमान में अन्य मामलों में जेल में निरुद्ध हैं। इस आधार पर इनके विरुद्ध चल रही गुंडा एक्ट की कार्रवाई समाप्त कर दी गई।
पर्याप्त आधार न मिलने पर दो नोटिस निरस्त
महेंद्र पुत्र विपिन चंद्र निवासी गोलापार, थाना काठगोदाम के विरुद्ध केवल आबकारी अधिनियम का एक मामला दर्ज होने के आधार पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई शुरू की गई थी। सुनवाई के दौरान जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने पर्याप्त आधार न पाते हुए पुलिस कार्रवाई से असहमति व्यक्त की और नोटिस निरस्त कर दिया।
इसी प्रकार चंदन लोदियाल पुत्र हरेंद्र सिंह निवासी नथुआखान को पूर्व में ही अन्य मामले में जिला बदर किया जा चुका था। दोबारा चल रही कार्रवाई का औचित्य नहीं पाए जाने पर न्यायालय ने उसका नोटिस भी निरस्त करते हुए कार्रवाई समाप्त कर दी।
जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को कानून व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी, जबकि पर्याप्त आधार न होने या कार्रवाई का औचित्य समाप्त होने पर तथ्यों और विधिसम्मत प्रक्रिया के आधार पर मामलों का निस्तारण किया जाएगा।

Chief Editor, Aaj Khabar
